मेरी औकात देखने के लिए तेरी भी औकात होनी जरुरी है

मेरी औकात देखने के लिए तेरी भी औकात होनी जरुरी है

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हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं

जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो

तू मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे… अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं

जिनकी पहचान बनी मेरी वजह से आज वह मुझे ही नहीं पहचानते

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो

तू मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे… अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती