अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं

अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं

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हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है

तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा

खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु

मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो

अब मैं अपना वक़्त बरदाद नहीं करता जो चले गए है उन्हें याद नहीं करता

दुसरो की शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है अपनी ही मौज का फकीर बने रहना

हम मुश्किल वक़्त मैं भी मुस्कुराते है क्योंकि हम मुश्किलो से हारते नहीं उन्हें हराते है

तुझे क्या लगता है तेरे जाने से गम होगा, नहीं मेरी जान बस एक कॉन्टैक्ट कम होगा

खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु

मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो

अब मैं अपना वक़्त बरदाद नहीं करता जो चले गए है उन्हें याद नहीं करता

दुसरो की शर्तो पर सुल्तान बनने से कई गुना ज्यादा बेहतर है अपनी ही मौज का फकीर बने रहना