कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है

कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है

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हमको तोह सब ही पसंद करते है, अब क्या सबके हो जाए हम

“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!

इज्जत दोगे तो इज्जत पाओगे, अकड़ दिखाओगे तो हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे

मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता

फ़र्क़ बहुत हे तेरे और मेरे में, तुमने उस्तादों से सीखा है, मैंने हलातो से सीखा है

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!

हमको तोह सब ही पसंद करते है, अब क्या सबके हो जाए हम

“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!

इज्जत दोगे तो इज्जत पाओगे, अकड़ दिखाओगे तो हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे

मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता

फ़र्क़ बहुत हे तेरे और मेरे में, तुमने उस्तादों से सीखा है, मैंने हलातो से सीखा है

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!