कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है

कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है

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हम बाते हालत के हिसाब से करते है

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

गमंडी लड़किया मुझसे दूर ही रहे क्यूंकि मनाना मुझे आता नहीं और भाव में किसी को देता नही

रुठुंगा अगर तुजसे तो इस कदर रुठुंगा की ,, ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी

लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.

हम बाते हालत के हिसाब से करते है

हा अमीर तो नहीं हूं में पर जमीर ऐसा है जिसकी कभी बोली नहीं लग सकती

गमंडी लड़किया मुझसे दूर ही रहे क्यूंकि मनाना मुझे आता नहीं और भाव में किसी को देता नही

रुठुंगा अगर तुजसे तो इस कदर रुठुंगा की ,, ये तेरीे आँखे मेरी एक झलक को तरसेंगी

मुझसे नफरत ही करनी है तो इरादे मजबूत रखना.. जरा से भी चुके तो महोब्बत हो जायेगी

लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.