दुनिया बहुत स्वार्थी है, जबतक हमसे कोई काम होता है, तबतक दुनिया हमे पूछती है, और जब हमसे कोई काम नहीं होता, तब दुनिया हमारे बारे मे सोचती भी नहीं।

दुनिया बहुत स्वार्थी है, जबतक हमसे कोई काम होता है, तबतक दुनिया हमे पूछती है, और जब हमसे कोई काम नहीं होता, तब दुनिया हमारे बारे मे सोचती भी नहीं।

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न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की

जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।

हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।

जहाँ भरोसा है वहाँ सावधानी जरूर होनी चाहिए।

दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।

मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे, जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे

न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की अब वजह नहीं मिलती मुस्कुराने की

जब पास पैसे थे तब सारी दुनिया साथ थी, आज पास कुछ नहीं तो साथ भी कोई नहीं।

हर मित्रता के पीछे कोई न कोई स्वार्थ जरूर छुपा होता है।

जहाँ भरोसा है वहाँ सावधानी जरूर होनी चाहिए।

दोस्तों की औकात तो हमे तब पता चलती है जब हम संकट मे होते है।

मेरी तारीफ करे या मुझे बदनाम करे, जिसने जो बात करनी है सर-ए-आम करे