राह में सैकड़ों ठोकर आ जाए कोई फ़िक्र नहीं बस फोन में सेल्फी अच्छी आनी चाहिए

राह में सैकड़ों ठोकर आ जाए कोई फ़िक्र नहीं बस फोन में सेल्फी अच्छी आनी चाहिए

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मालूम नहीं सेल्फी लेना मजबूरी सा हो गया हैं फिलिंग गुड दिखना खुश रहने से अहम हो गया हैं.

“मैं पैदा ही हॉट हुई थी” “मैं अपनी फेवरिट हूं” “हां.. हां.. मैं सेल्फीहॉलिक हू”

लाइफ में किसकों टेंशन नहीं है मगर फिर भी हम मस्त है.

सेल्फी हमने भी ली किसी वृद्द की पीड़ा को अपना बनाकर

एक दिन में सब कुछ नहीं बना सकते, मगर एक अच्छा दिन जरुर बना सकते हैं.

“हमें तो कब से पता था कि तुम बेवफा हो बस तुझसे प्यार करते रहे कि शायद तुम्हारी फितरत बदल जाये।”

मालूम नहीं सेल्फी लेना मजबूरी सा हो गया हैं फिलिंग गुड दिखना खुश रहने से अहम हो गया हैं.

“मैं पैदा ही हॉट हुई थी” “मैं अपनी फेवरिट हूं” “हां.. हां.. मैं सेल्फीहॉलिक हू”

लाइफ में किसकों टेंशन नहीं है मगर फिर भी हम मस्त है.

सेल्फी हमने भी ली किसी वृद्द की पीड़ा को अपना बनाकर

एक दिन में सब कुछ नहीं बना सकते, मगर एक अच्छा दिन जरुर बना सकते हैं.

“हमें तो कब से पता था कि तुम बेवफा हो बस तुझसे प्यार करते रहे कि शायद तुम्हारी फितरत बदल जाये।”