मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं
न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम
अपने दिल में मेरे लिए नफरत रखने वालो बताओ क्या उखड लोगे
जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
मस्त रेहता हूं अपनी मस्ती मैं, जाता नहीं मतलबी लोगो की बस्ती मैं
न इश्क़ न गम देखो कितने खुश हे हम
अपने दिल में मेरे लिए नफरत रखने वालो बताओ क्या उखड लोगे
जैसा भी हूं अच्छा या बुरा अपने लिये हूं, मै खुद को नही देखता औरो की नजर से..!!