मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें
खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है
गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है
तुम सिर्फ मेरे हो अब इससे प्यार समझो या क़ब्ज़ा
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
जो मेरा होता है उस पर किसी का हक़ तो क्या नज़र तक बर्दाश्त नहीं करती मै
मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें
खौफ तो आवारा कुत्ते भी मचाते है पर दहशत हमेशा शेर की ही रहती है
गिरना अच्छा है औकात पता लगती है, कौन अपने साथ है ये बात पता लगती है
तुम सिर्फ मेरे हो अब इससे प्यार समझो या क़ब्ज़ा
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
जो मेरा होता है उस पर किसी का हक़ तो क्या नज़र तक बर्दाश्त नहीं करती मै