समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!
पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है
मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
शौक नहीं मुझे मोहब्बत का नफरत भरी ज़िन्दगी से खुश हूँ मै
समझा दो उन समझदारो को, की कातिलो की गली में भी दहशत हमारे ही नाम की है !!
पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है
मेरे अकेलेपन का मजाक बनाने वालों जरा ये तो बताओ.. जिस भीड़ में तुम खड़े हो.. उसमे कौन तुम्हारा है..
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
शौक नहीं मुझे मोहब्बत का नफरत भरी ज़िन्दगी से खुश हूँ मै