रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को
जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ
कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे
तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को
जुबान कड़वी ही सही मगर दिल साफ़ रखता हूँ कौन कब बदल गया सब हिसाब रखता हूँ
कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे
तंग नहीं करते हम उन्हें आजकल, यह बात भी उन्हें तंग करती है.
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं