जिन्हे हम ज़हर लगते हे वो हमें खा कर मर जाये
इरादे मेरे हमेशा साफ़ होते हैं.. इसलिये कई लोग मेरे खिलाफ होते हैं..
हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है
बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं
हम वक़्त के साथ शौक बदलते है दोस्त नहीं
समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो
जिन्हे हम ज़हर लगते हे वो हमें खा कर मर जाये
इरादे मेरे हमेशा साफ़ होते हैं.. इसलिये कई लोग मेरे खिलाफ होते हैं..
हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है
बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं
हम वक़्त के साथ शौक बदलते है दोस्त नहीं
समेट लो इन नाज़ुक पलों को नजाने ये लम्हा कल हो न हो, हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल उन पलों में हम हो न हो