बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
जिस दिन कामयाबी मिलेगी उस दिन मेरे ही चर्चे होंगे, उनकी एक महीने की इनकम मेरे एक दिन के खर्चे होंगे
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!
हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!
बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए
जिस दिन कामयाबी मिलेगी उस दिन मेरे ही चर्चे होंगे, उनकी एक महीने की इनकम मेरे एक दिन के खर्चे होंगे
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!
हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!