हम अपनी औकात जानते है कहो तो आपकी याद दिला दी

हम अपनी औकात जानते है कहो तो आपकी याद दिला दी

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पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है

वफादार और तुम....?? ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम......?? इल्जाम भी अच्छा है

हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!

धोखा देने के लिए शुक्रिया तुम ना मिलते तो दुनिया समझ में ना आती

बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं

अपुन की जिंदगी ताश के इक्के की तरह हे, जिसके बगेर रानी और बादशाह भी अधूरे हे

पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है

वफादार और तुम....?? ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम......?? इल्जाम भी अच्छा है

हाँ मै बदल गयी हूँ अब मै जाने वालो को रास्ता देती हूँ वास्ता नहीं!!

धोखा देने के लिए शुक्रिया तुम ना मिलते तो दुनिया समझ में ना आती

बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं

अपुन की जिंदगी ताश के इक्के की तरह हे, जिसके बगेर रानी और बादशाह भी अधूरे हे