मेरी आत्मकथा.... सिर्फ तुम्हारी कहानी है....
ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है
कुछ इस तरह से….नाराज हैं वो हमसे, जैसे उन्हें, किसी और ने…मना लिया हो..!
कोई केह दे उन्हें, अपनी ख़ास हिफाजत किया करे,, बेशक साँसे उनकी हे, पर जान तो मेरी हे
वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है
तेरी यादे.... तेरी बाते.... बस तेरे ही फ़साने हैं... हाँ हम क़ुबूल करते हैं हम तेरे ही दीवाने .
मेरी आत्मकथा.... सिर्फ तुम्हारी कहानी है....
ऐसा नही है कि मुझमे कोई ‘ऐब’ नही है.. पर सच कहता हूँ मुझमें ‘फरेब’ नहीं है
कुछ इस तरह से….नाराज हैं वो हमसे, जैसे उन्हें, किसी और ने…मना लिया हो..!
कोई केह दे उन्हें, अपनी ख़ास हिफाजत किया करे,, बेशक साँसे उनकी हे, पर जान तो मेरी हे
वो नकाब लगा कर खुद को इश्क से महफूज समझते रहे; नादां इतना भी नहीं समझते कि इश्क चेहरे से नहीं आँखों से शुरू होता है
तेरी यादे.... तेरी बाते.... बस तेरे ही फ़साने हैं... हाँ हम क़ुबूल करते हैं हम तेरे ही दीवाने .