सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है
परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा कोई कितना भी बड़ा नवाब हो
शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते
कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उन्हें समझ है
इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
हम दुनिया से अलग नहीं हमारी दुनिया ही अलग है
परवाह नहीं चाहे जमाना कितना भी खिलाफ हो हिसाब सबका होगा कोई कितना भी बड़ा नवाब हो
शेर खुद अपनी ताकत से राजा केहलाता है; जंगल मे चुनाव नही होते
कुछ लोग मुझे गलत समझते हैं तो मुझे बुरा नहीं लगता, क्योंकि वह मुझे उतना ही समझते हैं जितनी उन्हें समझ है
इसी बात से लगा लेना मेरी शोहरत का अन्दाजा… वो मुझे सलाम करते है, जिन्हे तु सलाम करता हैं