लोगो से डरना छोड़ दो इज़्ज़त खुदा देता है लोग नहीं
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं
बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं.. अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
हम अपनी औकात जानते है कहो तो आपकी याद दिला दी
लोगो से डरना छोड़ दो इज़्ज़त खुदा देता है लोग नहीं
जब मतलब न हो तो बोलना तो दूर लोग देखना तक छोड़ देते है
अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं
बुरे हैं ह़म तभी तो ज़ी रहे हैं.. अच्छे होते तो द़ुनिया ज़ीने नही देती
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
हम अपनी औकात जानते है कहो तो आपकी याद दिला दी