मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे
औकात की बात मत कर ऐ दोस्त तेरी बंदूक से ज़ादा लोग हमारे नाम से डरते है
मुँह पर सच बोलने की आदत है इसलिए मै बहुत बत्तमीज हूँ.
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!
जमाना क्या लुटेगा हमारी खुशियों को, हम तो खुद खुशियाँ दूसरों पर लुटा कर जीते हैं
किस घुमान मैं हो मोहतरमा भुला दिया हमने तुझे
औकात की बात मत कर ऐ दोस्त तेरी बंदूक से ज़ादा लोग हमारे नाम से डरते है