अबे सुन बे जा किसी और को सुधार मुझको नही चाहिए तेरा यह फ़ोकट का उदार

अबे सुन बे जा किसी और को सुधार मुझको नही चाहिए तेरा यह फ़ोकट का उदार

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आज कर लिया खुदसे ये वादा नहीं चाहेंगे किसीको उस्सकी औक़ात सी ज़्यादा.

नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

किसी ने क्या खूब लिखा है, मैं पसंद तो बहुत हूँ सबको पर जब उनको मेरी जरूरत होती है तब ..

आज कर लिया खुदसे ये वादा नहीं चाहेंगे किसीको उस्सकी औक़ात सी ज़्यादा.

नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

किसी ने क्या खूब लिखा है, मैं पसंद तो बहुत हूँ सबको पर जब उनको मेरी जरूरत होती है तब ..