जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता
ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा है, हम वह है जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं
कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे
वफादार और तुम….?? ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम……?? इल्जाम भी अच्छा है….!!
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
हम बाते हालत के हिसाब से करते है
नाराज़ है तो नाराज़ ही रहने दो किसीके पैरों में गिरकर जिना हमें नहीं आता
ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा है, हम वह है जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं
कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे
वफादार और तुम….?? ख्याल अच्छा है, बेवफा और हम……?? इल्जाम भी अच्छा है….!!