पल पल रंग बदलती है दुनिया और लोग पूछते है होली कब है |

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मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं

नहीं बदल सकते हम खुदको औरो का हीसाब से, एक हिसाब मुझे भी दिया है, खुदा न अपना हिसाब से ..

मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है

ऐटिटूड तो बच्चे दिखाते है हम तो लोगो को उनकी औकात दिखाते है

मुझे समझना तेरे बस की बात नहीं सोच बुलंद कर या फिर सोचना छोड़ दें

लहरें समंदर से उठती है किनारो से नहीं बदमाशी हिम्मत से होती है सहारो से नहीं

बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं

नहीं बदल सकते हम खुदको औरो का हीसाब से, एक हिसाब मुझे भी दिया है, खुदा न अपना हिसाब से ..

मैने खेल हमेशा खुद के दम पर खेले है इसलिए तेरे जैसे आज मेरे चेले है

ऐटिटूड तो बच्चे दिखाते है हम तो लोगो को उनकी औकात दिखाते है