पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
लोगो से डरना छोड़ दो इज़्ज़त खुदा देता है लोग नहीं
खुशी से संतुष्टि मिलती है और संतुष्टि से खुशी मिलती है परन्तु फर्क बहुत बड़ा है “खुशी” थोड़े समय के लिए संतुष्टि देती है, और “संतुष्टि” हमेशा के लिए खुशी देती है
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता
जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
लोगो से डरना छोड़ दो इज़्ज़त खुदा देता है लोग नहीं
खुशी से संतुष्टि मिलती है और संतुष्टि से खुशी मिलती है परन्तु फर्क बहुत बड़ा है “खुशी” थोड़े समय के लिए संतुष्टि देती है, और “संतुष्टि” हमेशा के लिए खुशी देती है
रिश्ते उन्ही से बनाओ, जो निभाने की ओकात रखते हो..
मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता
जिगर बड़ा था इसलिए टकराने आ गए, जो हमे नहीं जानते उन्हे भी तोह पता चले के जंगल में शेर पुराने आ गए