ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए

ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिए, इश्क और इबादत में नियत साफ रखिए

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आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

सिक्का दोनों का होता है हेड का भी ओर टेल का भी पर वक़्त उसी का आता है जो पलट कर ऊपर आता है |

पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है

औकात की बात मत कर ऐ दोस्त तेरी बंदूक से ज़ादा लोग हमारे नाम से डरते है

किस्मत से लड़ने में मजा आ रहा है ना किस्मत मुझे जीतने दे रही है ना मैं हार मान रहा हूँ.

बादशाह कोई भी हो जहा हम कदम रखते है वहा किसी की हुकूमत नहीं चलती।

आज भी हारी हुयी बाजी खेलना पसंद है हमें क्युकी हम किस्मत से ज्यादा अपने आप पे भरोसा करते है

सिक्का दोनों का होता है हेड का भी ओर टेल का भी पर वक़्त उसी का आता है जो पलट कर ऊपर आता है |

पत्थर सा बदनाम हूँ साहब, अपने शहर में आईना कहीं भी टूटे नाम मेरा ही आता है

औकात की बात मत कर ऐ दोस्त तेरी बंदूक से ज़ादा लोग हमारे नाम से डरते है

किस्मत से लड़ने में मजा आ रहा है ना किस्मत मुझे जीतने दे रही है ना मैं हार मान रहा हूँ.

बादशाह कोई भी हो जहा हम कदम रखते है वहा किसी की हुकूमत नहीं चलती।