दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं
वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है
अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं
में तो पहले से बदनाम हु तुम शरीफ लोग मेरा क्या उखाड़ लोगे
दोस्त को दौलत की निगाह से मत देखो , वफा करने वाले दोस्त अक्सर गरीब हुआ करते हैं
वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है
अब मत्त खोलना मेरी ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को जो था वो मैं रहा नहीं जो हूँ वो किसी को पता नहीं
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
जीना है तोह ऐसे जियो की पिता को भी लगे के हा मैंने एक शेर पाला हैं
में तो पहले से बदनाम हु तुम शरीफ लोग मेरा क्या उखाड़ लोगे