शेर अपना अकेला ही खुद शिकार करता है, और मै सिर्फ अपने ऐटिटूड से वार करता हूँ ||
घायल हु पर याद रखना घायल शेर की साँसे उसकी दहाड़ से भी ज़ादा खतरनाक होती है
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी में हाथ नहीं उठता बस नज़रों से गिरा देता हूँ
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
अगर नियत अच्छी हो तो नसीब कभी बुरा नहीं होता
शेर अपना अकेला ही खुद शिकार करता है, और मै सिर्फ अपने ऐटिटूड से वार करता हूँ ||
घायल हु पर याद रखना घायल शेर की साँसे उसकी दहाड़ से भी ज़ादा खतरनाक होती है
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
दुश्मनों को सज़ा देने की एक तहज़ीब है मेरी में हाथ नहीं उठता बस नज़रों से गिरा देता हूँ
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
अगर नियत अच्छी हो तो नसीब कभी बुरा नहीं होता