जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!
जो उड़ने का शोंक रखते है, वो गिरने का खौफ नहीं रखते..
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
मैं तोह पहले से ही बिगड़ा हुआ हु तुम जैसे मेरा क्या बिगाड़ लोगे
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है।
जो मज़ा अपनी पहचान बनाने मे है.. वो किसी और की परछाई बनने मे कहा..!
हक़ से दे तो तेरी “नफरत” भी सर आँखों पर, खैरात में तो तेरी “मोहब्बत” भी मंजूर नहीं…!
जो उड़ने का शोंक रखते है, वो गिरने का खौफ नहीं रखते..
नील गगन का आजाद पंछी जमाने की क़ैद से परे....
मैं तोह पहले से ही बिगड़ा हुआ हु तुम जैसे मेरा क्या बिगाड़ लोगे
महानता कभी ना गिरने में नहीं है, बल्कि हर बार गिरकर उठ जाने में है।