आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके
अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!
घायल हु पर याद रखना घायल शेर की साँसे उसकी दहाड़ से भी ज़ादा खतरनाक होती है
शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी
बादशाह कोई भी हो जहा हम कदम रखते है वहा किसी की हुकूमत नहीं चलती।
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!
आज तक एसी कोई रानी नही बनी जो इस बादशाह को अपना गुलाम बना सके
अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!
घायल हु पर याद रखना घायल शेर की साँसे उसकी दहाड़ से भी ज़ादा खतरनाक होती है
शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी, अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी
बादशाह कोई भी हो जहा हम कदम रखते है वहा किसी की हुकूमत नहीं चलती।
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!