तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे

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हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं, किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं

मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!

जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो

हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें

बदलना कौन चाहता है जनाब यहाँ लोग मजबूर कर देते है बदलने के लिए

हम अपनी इस अदा पर थोड़ा गुरूर करते हैं, किसी से प्यार हो या नफरत भरपूर करते हैं

मेरी कोई बुरी आदत नहीं है बस गुस्सा कण्ट्रोल नहीं होता

क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!

जो गया उसे जाने दो प्यार ही तो था कहीं और से आने दो