कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए
दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है
कोरोना के डर से इतनी भी दूरी न बनाये, की आपका बाबू किसी और के काबू में आजाये
गरीब थी बेचारी कुछ नहीं था देने को इसी लिए धोखा दे कर चली गई
कुछ को हकीकत कुछ को ख्वाब करना है, बहुत से लोग हैं जिनका हिसाब करना है
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
काम ऐसा करो की नाम हो जाए या फिर नाम ऐसा करो की सुनते ही काम हो जाए
दुनिया कहा चुप रहती है कहने दो जो कहती है