पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
हमारे सामने ज्यादा हीरो बनाने की कोशिश भी मत करना क्योंकि हम तालियों से ज्यादा गालियों से स्वागत करते है
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
हमारे सामने ज्यादा हीरो बनाने की कोशिश भी मत करना क्योंकि हम तालियों से ज्यादा गालियों से स्वागत करते है
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो
लोगो से डरना छोड़ दो, इज्जत ऊपरवाला देता है लोग नहीं.
“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!