हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है
अब मैं अपना वक़्त बरदाद नहीं करता जो चले गए है उन्हें याद नहीं करता
लोग केहते है की मेरे दोस्त कम है लेकीन, वोह नही जानते की मेरे दोस्तो मे कीतना "दम" हैं
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
हमें हद में रहना पसंद है और लोग उसे गरूर समझते हैं
कातिलों की महफ़िल में गुनेगार कौन है हमसे मत पूछिये ईमानदार कौन है
अब मैं अपना वक़्त बरदाद नहीं करता जो चले गए है उन्हें याद नहीं करता
लोग केहते है की मेरे दोस्त कम है लेकीन, वोह नही जानते की मेरे दोस्तो मे कीतना "दम" हैं
सुन छोरी? मैं अकेला था अकेला रहूँगा समझी? “चल हवा आने दे”
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं