दुश्मनों को हराओ या ना हराओ लेकिन उनके सामने ज़रूर मुस्कुराओ
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
ना मीठे हैं और न बनने की कोशिश करते हैं, हम तो वो सच हैं जो सबको कड़वे लगते हैं...
हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
दुश्मनों को हराओ या ना हराओ लेकिन उनके सामने ज़रूर मुस्कुराओ
दहशत आँखो में होनी चाहिए हतियार तो चौकीदार भी रखते है
ना मीठे हैं और न बनने की कोशिश करते हैं, हम तो वो सच हैं जो सबको कड़वे लगते हैं...
हक़ से दो तो तेरी नफरत भी कुबूल है हमें, खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें
सिर्फ पापा का प्यार सच्चा होता है पापा की परियों का नहीं
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.