कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे

कर लो नज़र अंदाज अपने हिसाब से, जब हम करेंगे तो बेहिसाब करेंगे

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तू मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे… अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!

अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

सुन बे खजूर वक़्त की बात है आज तेरा है कल मेरा होगा और जब मेरा होगा तोह सोच तेरा क्या होगा

तू मोहब्बत है मेरी इसीलिए दूर है मुझसे… अगर जिद होती तो शाम तक बाहों में होती

दुश्मनों से मोहब्बत होने लगी है… जब से अपनों को अजमाते चले गए॥

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!

अकड़ बहुत हैं हमने माना, तोड़ दूँगा हमें मत दिखाना

सुन बे खजूर वक़्त की बात है आज तेरा है कल मेरा होगा और जब मेरा होगा तोह सोच तेरा क्या होगा