शेर अपना अकेला ही खुद शिकार करता है, और मै सिर्फ अपने ऐटिटूड से वार करता हूँ ||
पल पल रंग बदलती है दुनिया और लोग पूछते है होली कब है |
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!
शेर अपना अकेला ही खुद शिकार करता है, और मै सिर्फ अपने ऐटिटूड से वार करता हूँ ||
पल पल रंग बदलती है दुनिया और लोग पूछते है होली कब है |
पैसा "हैसियत" बदल सकता है, "औकात" नहीं.
खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!