फर्क है दोस्ती और मोहब्बत में बरसों बाद मिलने पर मोहब्बत नजरें चुरा लेती है और दोस्ती गले लगा लेती हैं

फर्क है दोस्ती और मोहब्बत में बरसों बाद मिलने पर मोहब्बत नजरें चुरा लेती है और दोस्ती गले लगा लेती हैं

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खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो

झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है

तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे

बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं

वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है

पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।

खेल ताश का हो या जिंदगी का, अपना इक्का तब ही दिखाना जब सामने बादशाह हो

झुको केवल उतना ही जितना सही हो, बेवजह झुकना केबल दुसरो के अहम् को बढ़ावा देता है

तेवर तो हम वक़्त आने पे दिखायेगे शहर तुम खरीद लो पर हुकुमत हम चलायेंगे

बेटा दुश्मनी अपनी औकात वालो से कर बाप से नहीं

वक़्त वक़्त की बात है, हर कोई मतलब तक साथ है

पलटकर जवाब देना गलत बात है लेकिन सुनते रहो तो लोग बोलने की हदे भूल जाते है।