फर्क है दोस्ती और मोहब्बत में बरसों बाद मिलने पर मोहब्बत नजरें चुरा लेती है और दोस्ती गले लगा लेती हैं

फर्क है दोस्ती और मोहब्बत में बरसों बाद मिलने पर मोहब्बत नजरें चुरा लेती है और दोस्ती गले लगा लेती हैं

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अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो

“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!

अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!

कर लो नजर अंदाज अपने हिसाब से.. जब हम करेगे तो बेहिसाब करेगे..!

सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही

अच्छा हुआ जो तुमने हमें तोड़कर रख दिया, घमंड था मुझे बहुत की तुम सिर्फ मेरे हो

“बात” उन्हीं की होती है, जिनमें कोई “बात” होती है..!

अब मैं जब भी आऊंगी बस याद ही आऊंगी...!!

कर लो नजर अंदाज अपने हिसाब से.. जब हम करेगे तो बेहिसाब करेगे..!

सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है

हम आज भी शतरंज़ का खेल अकेले ही खेलते हे, क्युकी दोस्तों के खिलाफ चाल चलना हमे आता नही