प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ, नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
इज्जत दोगे तो इज्जत पाओगे, अकड़ दिखाओगे तो हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है
फ़र्क़ बहुत हे तेरे और मेरे में, तुमने उस्तादों से सीखा है, मैंने हलातो से सीखा है
प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ, नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा
अकेले चलने वाले लोग घंमडी नहीं होते वो बस अकेले ही काफी होते है
इज्जत दोगे तो इज्जत पाओगे, अकड़ दिखाओगे तो हमारा कुछ नहीं उखाड़ पाओगे
सच है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तो उसका बात करने का तरीका भी बदल जाता है
हमारी हस्ती भी कुछ ऐसी है साहेब, अच्छे लोग आप और बुरे लोग बाप कहते है
फ़र्क़ बहुत हे तेरे और मेरे में, तुमने उस्तादों से सीखा है, मैंने हलातो से सीखा है