चार बोटल पेपसी ...कार मेरी टेक्सी..फोन मेरा गेलेक्सी..माल मेरा सेक्सी ????
मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी मत समझो मैं दिल में गालियां भी देती हूँ
जब किस्मत में ही न हो कोई परी तो फिर किस बात की 14 फरवरी
ठंड तो आज ऐसे पढ़ रही है जैसे कल उसका पेपर हो
पहली सिगरेट हो या पहली बीयर कोई भी खरीदकर नहीं पीता … हमेशा कोई न कोई दानवीर हाथ में देकर कहता है – “पी ले, कुछ नहीं होगा
अंग्रेजी की किताब बन गई हो तुम | पसंद तो आती हो पर समझ् मे नही ||
चार बोटल पेपसी ...कार मेरी टेक्सी..फोन मेरा गेलेक्सी..माल मेरा सेक्सी ????
मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी मत समझो मैं दिल में गालियां भी देती हूँ
जब किस्मत में ही न हो कोई परी तो फिर किस बात की 14 फरवरी
ठंड तो आज ऐसे पढ़ रही है जैसे कल उसका पेपर हो
पहली सिगरेट हो या पहली बीयर कोई भी खरीदकर नहीं पीता … हमेशा कोई न कोई दानवीर हाथ में देकर कहता है – “पी ले, कुछ नहीं होगा
अंग्रेजी की किताब बन गई हो तुम | पसंद तो आती हो पर समझ् मे नही ||