पढ पढ के हो गया BORE और उपर से ऐ KATRINA ,केह रही है तेरी Ore तेरी Ore.
गिरगिट की आखिरी जुबान “में आजकल रंग बदलने में लोगों का मुकाबला नहीं कर पा रही हूं
हम Single लोग हैं साहब, हम Date पर नहीं भंडारे में जाते हैं..
आदमी कभी भी इतना झूठा नहीं होता अगर औरतें इतने सवाल न करती
बहुत अच्छा लगता है उन रिश्तेदारों के घर जाना, जो जाते ही कहते हैं कि बेटा वाइफ़ाई का पास्वर्ड लो और आराम से अपना घर समझ के बैठो ?
वो तुम्हे डोमिनोस के लिए कहेगी लेकिन तुम भंडारे पर अड़े रहना
पढ पढ के हो गया BORE और उपर से ऐ KATRINA ,केह रही है तेरी Ore तेरी Ore.
गिरगिट की आखिरी जुबान “में आजकल रंग बदलने में लोगों का मुकाबला नहीं कर पा रही हूं
हम Single लोग हैं साहब, हम Date पर नहीं भंडारे में जाते हैं..
आदमी कभी भी इतना झूठा नहीं होता अगर औरतें इतने सवाल न करती
बहुत अच्छा लगता है उन रिश्तेदारों के घर जाना, जो जाते ही कहते हैं कि बेटा वाइफ़ाई का पास्वर्ड लो और आराम से अपना घर समझ के बैठो ?
वो तुम्हे डोमिनोस के लिए कहेगी लेकिन तुम भंडारे पर अड़े रहना