जिंदगी ने जख्म बहुत दिए, लेकिन हरेक को सिल लेता हूं। डार्लिंग तुम आलू उबालो, मैं मटर छील लेता हूं
ये सोच कर की शायद वो खिड़की से झाँक ले, उसकी गली के बच्चे आपस में लड़ा दिए मैंने
इंसान हो तो सच्चे रहो बाकी,,, झूठे तो बर्तन भी होते है ?
गर्लफ्रेंड: तुम्हारा दिमाग एकदम सड़ गया है। पप्पू: हां, शायद तुम्हें ज्यादा पता है। रोज-रोज खाती जो रहती हो।
क्या फायदा ऐसी मोहब्बत का... कि मैं उदास रहूँ और तू सोया रहे..
बहुत देखा जीवन में समझदार बन कर पर ख़ुशी हमेशा पागल बनने पर आयी।
जिंदगी ने जख्म बहुत दिए, लेकिन हरेक को सिल लेता हूं। डार्लिंग तुम आलू उबालो, मैं मटर छील लेता हूं
ये सोच कर की शायद वो खिड़की से झाँक ले, उसकी गली के बच्चे आपस में लड़ा दिए मैंने
इंसान हो तो सच्चे रहो बाकी,,, झूठे तो बर्तन भी होते है ?
गर्लफ्रेंड: तुम्हारा दिमाग एकदम सड़ गया है। पप्पू: हां, शायद तुम्हें ज्यादा पता है। रोज-रोज खाती जो रहती हो।
क्या फायदा ऐसी मोहब्बत का... कि मैं उदास रहूँ और तू सोया रहे..
बहुत देखा जीवन में समझदार बन कर पर ख़ुशी हमेशा पागल बनने पर आयी।