ठंड तो आज ऐसे पढ़ रही है जैसे कल उसका पेपर हो
जिंदगी ने जख्म बहुत दिए, लेकिन हरेक को सिल लेता हूं। डार्लिंग तुम आलू उबालो, मैं मटर छील लेता हूं
पढ़ना लिखना त्याग, नक़ल से रख आस, ओढ़ रजाई सो जा बेटा, रब करेगा पास
देश के युवा जाग चुके हैं अब ये उठेंगे ब्रश करेंगे और Whatsapp चलाएंगे
किस किस का नाम लें, अपनी बरबादी मेँ; बहुत लोग आये थे दुआयेँ देने शादी मेँ !
टिकटोक वाले खुद को बॉलीवुड स्टार समझते हैं और पब जी वाले खुद को आर्मी के जवान
ठंड तो आज ऐसे पढ़ रही है जैसे कल उसका पेपर हो
जिंदगी ने जख्म बहुत दिए, लेकिन हरेक को सिल लेता हूं। डार्लिंग तुम आलू उबालो, मैं मटर छील लेता हूं
पढ़ना लिखना त्याग, नक़ल से रख आस, ओढ़ रजाई सो जा बेटा, रब करेगा पास
देश के युवा जाग चुके हैं अब ये उठेंगे ब्रश करेंगे और Whatsapp चलाएंगे
किस किस का नाम लें, अपनी बरबादी मेँ; बहुत लोग आये थे दुआयेँ देने शादी मेँ !
टिकटोक वाले खुद को बॉलीवुड स्टार समझते हैं और पब जी वाले खुद को आर्मी के जवान