गिरगिट की आखिरी जुबान “में आजकल रंग बदलने में लोगों का मुकाबला नहीं कर पा रही हूं
ये सोच कर की शायद वो खिड़की से झाँक ले, उसकी गली के बच्चे आपस में लड़ा दिए मैंने
पढ पढ के हो गया BORE और उपर से ऐ KATRINA ,केह रही है तेरी Ore तेरी Ore.
इश्क का समंदर भी क्या समंदर है... जो डूब गया वो #आशिक... जो बच गया वो #दीवाना... जो तैरता ही रह गया वह #पति
जिसको भी देखा रोते हुए देखा... मुझे तो ये मोहब्बत टिशु पेपर कम्पनी की साजिश लगती है
मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी मत समझो मैं दिल में गालियां भी देती हूँ
गिरगिट की आखिरी जुबान “में आजकल रंग बदलने में लोगों का मुकाबला नहीं कर पा रही हूं
ये सोच कर की शायद वो खिड़की से झाँक ले, उसकी गली के बच्चे आपस में लड़ा दिए मैंने
पढ पढ के हो गया BORE और उपर से ऐ KATRINA ,केह रही है तेरी Ore तेरी Ore.
इश्क का समंदर भी क्या समंदर है... जो डूब गया वो #आशिक... जो बच गया वो #दीवाना... जो तैरता ही रह गया वह #पति
जिसको भी देखा रोते हुए देखा... मुझे तो ये मोहब्बत टिशु पेपर कम्पनी की साजिश लगती है
मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी मत समझो मैं दिल में गालियां भी देती हूँ