अच्छे के साथ बुरा भी उसके अच्छे के लिए ही होता है..
मुश्किल वक़्त में किसी का सहारा बनो सलाहकार नही
जब तक किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संभावनाओं से अधिक कार्य नहीं किया जाता है, तब तक उस व्यक्ति द्वारा वह सब कुछ नहीं किया जा सकेगा जो वह कर सकता है
अगर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं, तो अपनी रणनीति बदलिए न कि लक्ष्य।
किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे
लोग कहते है तुम इतना खुश कैसे रहते हो..हमने कहाँ हम किसी को खुश देखकर जलते नही और अपना दुख किसी को बताते नही
अच्छे के साथ बुरा भी उसके अच्छे के लिए ही होता है..
मुश्किल वक़्त में किसी का सहारा बनो सलाहकार नही
जब तक किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संभावनाओं से अधिक कार्य नहीं किया जाता है, तब तक उस व्यक्ति द्वारा वह सब कुछ नहीं किया जा सकेगा जो वह कर सकता है
अगर आप अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं, तो अपनी रणनीति बदलिए न कि लक्ष्य।
किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे
लोग कहते है तुम इतना खुश कैसे रहते हो..हमने कहाँ हम किसी को खुश देखकर जलते नही और अपना दुख किसी को बताते नही