ढुढो सुकून तोह ख़ुद में हे दूसरो में सिर्फ उलझन मिलेगी
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी
सत्य कड़वा नहीं होता (जनाब,) तुम सिर्फ झूठ के स्वाद से वाकिफ़ हो।
सबसे बेहतरीन नजऱ वो है, जो अपनी कमियों को देख सके।
"जब तक किसी काम को किया नहीं जाता तब तक वह असंभव ही लगता है
ढुढो सुकून तोह ख़ुद में हे दूसरो में सिर्फ उलझन मिलेगी
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
जितना कठिन संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी
सत्य कड़वा नहीं होता (जनाब,) तुम सिर्फ झूठ के स्वाद से वाकिफ़ हो।
सबसे बेहतरीन नजऱ वो है, जो अपनी कमियों को देख सके।
"जब तक किसी काम को किया नहीं जाता तब तक वह असंभव ही लगता है