थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है
चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है
अगर तुम सच में कुछ करना चाहते हो तो रास्ता निकाल लोगे ,वरना न करने का बहाना निकाल लोगे
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
यदि आप पैसा खर्च करते समय सोचते है तो इसका मतलब यह है कि आप मेहनत का पैसा कमा रहे है
थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है
चीजें खुद नहीं होतीं, उन्हें करना पड़ता है
अगर तुम सच में कुछ करना चाहते हो तो रास्ता निकाल लोगे ,वरना न करने का बहाना निकाल लोगे
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
इंसान का व्यक्तित्व तभी उभर के आता है जब वो अपनो से ठोकर खाता है...
यदि आप पैसा खर्च करते समय सोचते है तो इसका मतलब यह है कि आप मेहनत का पैसा कमा रहे है