विश्वाश में वो ताकत है जिससे हम जो चाहे संपत्ति खरीद सकते है
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
यदि आपको किसी एक से शिकायत है तो उससे बात कीजिये लेकिन अगर आपको अधिकतर लोगों से शिकायत है तो खुद से बात कीजिये
एक परवाह ही तो बताती है कि कौन किसका कितना ख्याल रखता है. वरना रिश्तों की गहराइयों को मापने का कोई तराजू नहीं होता है
मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते
विश्वाश में वो ताकत है जिससे हम जो चाहे संपत्ति खरीद सकते है
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
यदि आपको किसी एक से शिकायत है तो उससे बात कीजिये लेकिन अगर आपको अधिकतर लोगों से शिकायत है तो खुद से बात कीजिये
एक परवाह ही तो बताती है कि कौन किसका कितना ख्याल रखता है. वरना रिश्तों की गहराइयों को मापने का कोई तराजू नहीं होता है
मंजिल मेरे कदमों से अभी दूर बहुत है... मगर तसल्ली ये है कि कदम मेरे साथ हैं
उलझने मैंने कई झुक के भी सुलझायी है लोग सारे तो कद के बराबर नही होते