तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े
सबको खुश नही रखा जा सकता है, इसलिए भगवान बनने की कोशिश न कर
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
जिसकी मति और गति सत्य कि हो उसका रथ आज भी श्री कृष्ण चलाते है
खूबी और खामी दोनो ही होती है लोगों में आप क्या तलाशते हो ये महत्वपूर्ण है
अपनी बातों को सदैव ध्यानपूर्वक कहे क्योंकि हम तो कहकर भूल जाते है, लेकिन लोग उसे याद रखते है।
तब तक मेहनत करते रहो जब तक आपको अपना परिचय खुद किसी को देने की जरूरत ना पड़े
सबको खुश नही रखा जा सकता है, इसलिए भगवान बनने की कोशिश न कर
इंसान के अंदर ही समा जाए, वो स्वाभिमान होता है... और जो बाहर छलक जाए वो अभिमान होता है...
जिसकी मति और गति सत्य कि हो उसका रथ आज भी श्री कृष्ण चलाते है
खूबी और खामी दोनो ही होती है लोगों में आप क्या तलाशते हो ये महत्वपूर्ण है
अपनी बातों को सदैव ध्यानपूर्वक कहे क्योंकि हम तो कहकर भूल जाते है, लेकिन लोग उसे याद रखते है।