इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है
बेशक गलती भूल जाओ, मगर
अगर आप चाहते हैं कि कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये
जब जिंदगी में कुछ बड़ा करने की कोशिश करोगे तब , ना कोई ध्यान देगा ना कोई साथ देगा
बहुत मुश्किल है उस शख्स को गिराना, जिसको चलना ठोकरों ने सिखाया हो .
आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है
इंसान को यूँ ही मतलबी नहीं कहा जाता, उसे अपने सुख से ज्यादा दुसरे के दुःख में मज़ा आता है
बेशक गलती भूल जाओ, मगर
अगर आप चाहते हैं कि कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये
जब जिंदगी में कुछ बड़ा करने की कोशिश करोगे तब , ना कोई ध्यान देगा ना कोई साथ देगा
बहुत मुश्किल है उस शख्स को गिराना, जिसको चलना ठोकरों ने सिखाया हो .
आपका परम मित्र भी किसी कारण वश, आपका परम शत्रु बनकर खड़ा हो सकता है