दिन में दीपक जलना, समुद्र में वर्षा, भरे पेट के लिए भोजन और धनवान को दान देना व्यर्थ है.
यदि तुम वह चाहते हो जो तुम्हारे पास नही है, तो तुम्हे वह करना होगा जो आज तक नही किया
तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया
अगर तुम सोचते हो कि तुम समय काट रहे हो, तो वहम में हो .. !! क्योंकि तुम समय काट नहीं रहे....... बल्कि यह समय " तुम्हें काट रहा है ।
सम्मान सभी को देना मगर आत्मसम्मान कभी न खोना।
बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे
दिन में दीपक जलना, समुद्र में वर्षा, भरे पेट के लिए भोजन और धनवान को दान देना व्यर्थ है.
यदि तुम वह चाहते हो जो तुम्हारे पास नही है, तो तुम्हे वह करना होगा जो आज तक नही किया
तो क्या हुआ जो पहली बार में सफलता नहीं मिली, वैसे तो ईश्वर आज तक भी नहीं मिला, लेकिन क्या हमने पूजा करना छोड़ दिया
अगर तुम सोचते हो कि तुम समय काट रहे हो, तो वहम में हो .. !! क्योंकि तुम समय काट नहीं रहे....... बल्कि यह समय " तुम्हें काट रहा है ।
सम्मान सभी को देना मगर आत्मसम्मान कभी न खोना।
बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे