तेरे पास जो है उसकी कदर कर, यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।
अगर जीवन मे कभी मौका मिले तो सारथी बनने का प्रयास करना स्वार्थी नही !
सज्जन की राय का उल्लंघन न करें।
जिंदगी में ऐसे लोग भी मिलते हैं.... जो वादे तो नहीं करते लेकिन निभा बहुत कुछ जाते है.,. अक्सर वही रिश्ते, लाजवाब होते हैं... जो एहसानों से नहीं, एहसासों से बने होते हैं..!
तेरे पास जो है उसकी कदर कर, यहां आसमान के पास भी खुद की ज़मीं नहीं
साधुजन के दर्शन से पुण्य प्राप्त होता है. साधु तीर्थों के समान होते हैं, तीर्थों का फल तो कुछ समय बाद मिलता है, किन्तु साधु समागम तुरंत फल देता है’
सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।
अगर जीवन मे कभी मौका मिले तो सारथी बनने का प्रयास करना स्वार्थी नही !
सज्जन की राय का उल्लंघन न करें।
जिंदगी में ऐसे लोग भी मिलते हैं.... जो वादे तो नहीं करते लेकिन निभा बहुत कुछ जाते है.,. अक्सर वही रिश्ते, लाजवाब होते हैं... जो एहसानों से नहीं, एहसासों से बने होते हैं..!