आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..
खुद को कभी अकेला महसूस न करे क्योंकि
जंजीर नहीं कटती तो अपने पांव काट लो, लंगड़ा कर चलो, मगर आज़ादी से चलो
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
जिंदगी में ऐसे लोग भी मिलते हैं.... जो वादे तो नहीं करते लेकिन निभा बहुत कुछ जाते है.,. अक्सर वही रिश्ते, लाजवाब होते हैं... जो एहसानों से नहीं, एहसासों से बने होते हैं..!
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..
खुद को कभी अकेला महसूस न करे क्योंकि
जंजीर नहीं कटती तो अपने पांव काट लो, लंगड़ा कर चलो, मगर आज़ादी से चलो
कोशिश हमेशा आखरी साँस तक करनी चाहिए या तो लक्ष्य हासिल होगा या अनुभव
जिंदगी में ऐसे लोग भी मिलते हैं.... जो वादे तो नहीं करते लेकिन निभा बहुत कुछ जाते है.,. अक्सर वही रिश्ते, लाजवाब होते हैं... जो एहसानों से नहीं, एहसासों से बने होते हैं..!
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...