कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
सबको ओढनी है मिट्टी की चादर एक दिन, ऐसा कोई दिया नहीं जिस पर हवा की नजर नहीं
इतना भी चुप न रहना कभी कि लोग
मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।
अपने आप को हर परिश्थिति में शांत रहने के लिए तैयार करे.
हमेशा दूसरों की सफलता के बारे में जानने के बजाय खुद की सफलता पर काम कीजिए
कर्म सुख भले ही न ला सके, परंतु कर्म के बिना सुख नहीं मिलता
सबको ओढनी है मिट्टी की चादर एक दिन, ऐसा कोई दिया नहीं जिस पर हवा की नजर नहीं
इतना भी चुप न रहना कभी कि लोग
मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।
अपने आप को हर परिश्थिति में शांत रहने के लिए तैयार करे.
हमेशा दूसरों की सफलता के बारे में जानने के बजाय खुद की सफलता पर काम कीजिए