अपनों से बस उतना रूठो कि आपकी बात और सामने वाले की इज्जत बरकरार रहे
जिस प्रकार घिसने, तापने, काटने और पीटने से सोने का परीक्षण होता है. उसी प्रकार त्याग, शील, गुण, एवं कर्मों से पुरुष कि परीक्षा होती है.
खुशियाँ चाहे किसीके साथ भी बाँट लो, लेकिन गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए
मन होना चाहिए किसी को याद करने का वक्त तो अपने आप ही मिल जाता है
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
देखा हुआ सपना,सपना ही रह जाता है जब तक उसे पूरा करने के लिए मेहनत ना कि जाये
अपनों से बस उतना रूठो कि आपकी बात और सामने वाले की इज्जत बरकरार रहे
जिस प्रकार घिसने, तापने, काटने और पीटने से सोने का परीक्षण होता है. उसी प्रकार त्याग, शील, गुण, एवं कर्मों से पुरुष कि परीक्षा होती है.
खुशियाँ चाहे किसीके साथ भी बाँट लो, लेकिन गम भरोसेमंद के साथ ही बाँटना चाहिए
मन होना चाहिए किसी को याद करने का वक्त तो अपने आप ही मिल जाता है
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
देखा हुआ सपना,सपना ही रह जाता है जब तक उसे पूरा करने के लिए मेहनत ना कि जाये