रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।
कठिन समय के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए।
यदि कोई आपसे जलता है जनाब तो यह भी एक सफलता है
ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं, काम-वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं और अज्ञानता के जैसा शत्रु कोई नहीं.
फोकस खुद पे करो जब तक लोग तुम पर फोकस ना करे
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।
कठिन समय के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए।
यदि कोई आपसे जलता है जनाब तो यह भी एक सफलता है
ज्ञान से बढ़कर कोई दूसरा गुरु नहीं, काम-वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं और अज्ञानता के जैसा शत्रु कोई नहीं.
फोकस खुद पे करो जब तक लोग तुम पर फोकस ना करे