किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है
एक बात हमेशा ध्यान रखो कि समय और स्थिति कभी भी बदल सकती है इसलिए कभी भी किसी का अपमान मत करो।
कड़ी मेहनत और खुदा की रहमत इंसान को गिरने नही देती...
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
ऐसे कार्य करें जिससे की आपको लगे कि आपके काम से अंतर आ रहा है. और अंतर आता भी है
एक बात हमेशा ध्यान रखो कि समय और स्थिति कभी भी बदल सकती है इसलिए कभी भी किसी का अपमान मत करो।
कड़ी मेहनत और खुदा की रहमत इंसान को गिरने नही देती...
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
पत्तों सी होती है कई रिश्तों की उम्र...! आज हरे...........कल सूखे क्यों न हम जड़ों से रिश्ते निभाना सीखें...