जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए
मन में उतरना और मन से उतरना केवल आपके व्यवहार पर निर्भर करता है
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है
यदि आप वही करते है जो आप हमेशा से करते आये है तो आप को वही मिलेगा जो हमेशा से मिलता आया है
आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..
कोई भी काम कठिन हो सकता है लेकिन असंभव नही
जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए
मन में उतरना और मन से उतरना केवल आपके व्यवहार पर निर्भर करता है
इच्छाओं का भी अपना चरित्र होता है... खुद के मन की हो तो बहुत अच्छी लगती हैं दूसरों के मन की हो तो बहुत खटकती है
यदि आप वही करते है जो आप हमेशा से करते आये है तो आप को वही मिलेगा जो हमेशा से मिलता आया है
आप वापस नहीं जा सकते है और शुरुवात को नही बदल सकते है, लेकिन जहां है वही से शुरू कर सकते है और अंत को बदल सकते है..
कोई भी काम कठिन हो सकता है लेकिन असंभव नही