आपकी अच्छाइयों, बेशक अदृश्य हो सकती है लेकिन, इनकी छाप हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है
इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।
जिन्हें बुलाना पड़े, समझ लो कि वो दूर है
तकलीफ़े भी अच्छी है..
खुद को अपनी नजरों से गिराना छोड़ दो, जब लोग तुम्हें ना
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है
आपकी अच्छाइयों, बेशक अदृश्य हो सकती है लेकिन, इनकी छाप हमेशा दूसरों के हृदय में विराजमान रहती है
इज़्ज़त, मोहब्बत, तारीफ़ और दुआ...माँगी नहीं जाती, कमाई जाती है...।।
जिन्हें बुलाना पड़े, समझ लो कि वो दूर है
तकलीफ़े भी अच्छी है..
खुद को अपनी नजरों से गिराना छोड़ दो, जब लोग तुम्हें ना
अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है