एक बार माफ करके अच्छे बन जाओ लेकिन... मगर दुबारा उसी इन्सान पर भरोसा कर के बेवकूफ मत बनो

एक बार माफ करके अच्छे बन जाओ लेकिन... मगर दुबारा उसी इन्सान पर भरोसा कर के बेवकूफ मत बनो

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जैसे फलों में गंध, तिलों में तेल, काष्ठ में अग्नि, दुग्ध में घी, गन्ने में गुड़ है, उसी तरह शरीर में परमात्मा है. इसे पहचानना चाहिए.

भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.

कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है, भगवान सिर्फ लकीरें देता है, रंग हमें ही भरना है

भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।

किसी को डर है कि भगवान देख रहा है किसी को भरोसा है कि भगवान देख रहा है

विचारों को पढ़कर छोड़ देने से जीवन में कोई बदलाव नहीं आता विचार तभी बदलाव लाते हैं जब विचारों को जीवन में उतारा जाता है

जैसे फलों में गंध, तिलों में तेल, काष्ठ में अग्नि, दुग्ध में घी, गन्ने में गुड़ है, उसी तरह शरीर में परमात्मा है. इसे पहचानना चाहिए.

भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.

कर्म भूमि की दुनिया में श्रम सभी को करना है, भगवान सिर्फ लकीरें देता है, रंग हमें ही भरना है

भरोशा करो लेकिन किसी के भरोशे मत रहो ।

किसी को डर है कि भगवान देख रहा है किसी को भरोसा है कि भगवान देख रहा है

विचारों को पढ़कर छोड़ देने से जीवन में कोई बदलाव नहीं आता विचार तभी बदलाव लाते हैं जब विचारों को जीवन में उतारा जाता है