मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.
संकट में मनुष्य को वास्तु दोष, पितर दोष शनि दोष सब याद आ जाते है, लेकिन अपने दोष दिखाई नही देते है
खुश रहकर गुजारो, तो, मस्त है जिदंगी,.. दुखी रहकर गुजारो, तो त्रस्त है जिंदगी, तुलना में गुजारो, तो पस्त है जिंदगी, इतंजार में गुजारो, तो सुस्त है जिंदगी, सीखने में गुजारो, तो किताब है जिंदगी, दिखावे में गुजारो, तो बर्बाद है जिदंगी, मिलती है एक बार, प्यार से बिताओ जिदंगी, जन्म तो रोज होते हैं, यादगार बनाओ जिंदगी!!
ये जिंदगी तभी तक झंड लगती है जब तक जिंदगी में पैसा ना हो
दरिया बनकर किसी को ड़ुबाने से बेहतर है, जरिया बनकर किसी को बचाया जाये
●आवाज का लहजा एक पल में बता देता है कि... रिश्ता कितना गहरा है●
मनुष्य अकेला ही जन्म लेता है, अकेला ही दुःख भोगता है, अकेला ही मोक्ष का अधिकारी होता है और अकेला ही नरक जाता है. अतः रिश्ते-नाते तो क्षण भंगुर हैं, हमें अकेले ही दुनिया के मंच पर अभिनय करना पड़ता है.
संकट में मनुष्य को वास्तु दोष, पितर दोष शनि दोष सब याद आ जाते है, लेकिन अपने दोष दिखाई नही देते है
खुश रहकर गुजारो, तो, मस्त है जिदंगी,.. दुखी रहकर गुजारो, तो त्रस्त है जिंदगी, तुलना में गुजारो, तो पस्त है जिंदगी, इतंजार में गुजारो, तो सुस्त है जिंदगी, सीखने में गुजारो, तो किताब है जिंदगी, दिखावे में गुजारो, तो बर्बाद है जिदंगी, मिलती है एक बार, प्यार से बिताओ जिदंगी, जन्म तो रोज होते हैं, यादगार बनाओ जिंदगी!!
ये जिंदगी तभी तक झंड लगती है जब तक जिंदगी में पैसा ना हो
दरिया बनकर किसी को ड़ुबाने से बेहतर है, जरिया बनकर किसी को बचाया जाये
●आवाज का लहजा एक पल में बता देता है कि... रिश्ता कितना गहरा है●