तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .

तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .

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इंसान को इंसान के नजरिये से तोलिये दो शब्द ही सही मगर प्यार से बोलिये

कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो

जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है इसलिए स्वयं को अधिक तनावग्रस्त न करें, क्योंकि परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब हों, बदलेंगी जरूर

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है, अवतार नहीं गिर, उठ, चल, दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं.

नम्रता से बोलना हर एक का आदर करना शुक्रिया अदा करना और माफ़ी माँगना ये चार गुण जिस व्यक्ति के पास है वो सबके क़रीब और सबके लिए खास है

एक "अच्छी" शुरुआत के लिए... कोई भी दिन "बुरा" नही होता

इंसान को इंसान के नजरिये से तोलिये दो शब्द ही सही मगर प्यार से बोलिये

कोई तब तक आपकी सवारी नहीं कर सकता जब तक आपकी पीठ झुकी ना हो

जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है इसलिए स्वयं को अधिक तनावग्रस्त न करें, क्योंकि परिस्थितियां चाहे कितनी भी खराब हों, बदलेंगी जरूर

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं तू इंसान है, अवतार नहीं गिर, उठ, चल, दौड़ फिर भाग क्योंकि जीवन संक्षिप्त है इसका कोई सार नहीं.

नम्रता से बोलना हर एक का आदर करना शुक्रिया अदा करना और माफ़ी माँगना ये चार गुण जिस व्यक्ति के पास है वो सबके क़रीब और सबके लिए खास है

एक "अच्छी" शुरुआत के लिए... कोई भी दिन "बुरा" नही होता