मासूमियत इतनी भी नही होनी चाहिए की लोग आपके साथ वक्त गुजारे और आप उसे म्होब्बत समझे
यह सोचकर हमेशा खुश रहो खुश रहो; जो था; अच्छा था जो बाकी है वह बेहतर है और जो आगे चलकर मिलेगा वह बेहतरीन होगा..
फासले जब महसूस होने लगे तो बना भी लेने चाहिए
जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौट कर सिर्फ यादें आती हैं वक़त नहीं
वक़्त का खाश होना जरूरी नही खाश के लिए वक़्त होना जरूरी है
जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है
मासूमियत इतनी भी नही होनी चाहिए की लोग आपके साथ वक्त गुजारे और आप उसे म्होब्बत समझे
यह सोचकर हमेशा खुश रहो खुश रहो; जो था; अच्छा था जो बाकी है वह बेहतर है और जो आगे चलकर मिलेगा वह बेहतरीन होगा..
फासले जब महसूस होने लगे तो बना भी लेने चाहिए
जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौट कर सिर्फ यादें आती हैं वक़त नहीं
वक़्त का खाश होना जरूरी नही खाश के लिए वक़्त होना जरूरी है
जो ना मिले उसकी ही चाहत होती है, जो मिल जाये उसकी कदर कहाँ होती है