बहुत मुश्किल है उस शख्स को गिराना, जिसको चलना ठोकरों ने सिखाया हो .
रत्न तो लाख मिले एक ह्रदय धन न मिला, दर्द हर वक्त मिला, चैन किसी क्षण न मिला, ढूँढ़ते-ढूँढ़ते ढल गई धूप जीवन की मगर, दूसरी बार लौट के हमें बचपन न मिला...!
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
विदेश में विद्या मित्र के समान होती है, औषधि रोगियों कि मित्र होती है, पत्नी घर में मित्र होती है और मृतक का मित्र होता है- धर्म .
जो परीक्षा ले रहा है बारम्बार, वो खुशी भी देगा अपरम्पार
दुर्जन को साहस से, बलवान को अनुकूल व्यवहार से और समान शक्तिशाली को नम्रता से अथवा अपनी ताकत से वश में करना चाहिए.
बहुत मुश्किल है उस शख्स को गिराना, जिसको चलना ठोकरों ने सिखाया हो .
रत्न तो लाख मिले एक ह्रदय धन न मिला, दर्द हर वक्त मिला, चैन किसी क्षण न मिला, ढूँढ़ते-ढूँढ़ते ढल गई धूप जीवन की मगर, दूसरी बार लौट के हमें बचपन न मिला...!
रिश्ते तो सूर्यमुखी के फूलों की तरह होते हैं जिधर प्यार मिले... उधर ही घूम जाते हैं...
विदेश में विद्या मित्र के समान होती है, औषधि रोगियों कि मित्र होती है, पत्नी घर में मित्र होती है और मृतक का मित्र होता है- धर्म .
जो परीक्षा ले रहा है बारम्बार, वो खुशी भी देगा अपरम्पार
दुर्जन को साहस से, बलवान को अनुकूल व्यवहार से और समान शक्तिशाली को नम्रता से अथवा अपनी ताकत से वश में करना चाहिए.