तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .

तकदीर ऐसे ही नहीं बदलती, पहले अपनी सोच को बदलना पड़ता है .

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दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।

बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है

“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !

खूबी और खामी दोनो ही होती है लोगों में आप क्या तलाशते हो ये महत्वपूर्ण है।

किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे

इतना भी चुप न रहना कभी कि लोग

दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।

बादशाह सिर्फ वक्त होता है, इन्सान तो यूँ ही गुरुर करता है

“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !

खूबी और खामी दोनो ही होती है लोगों में आप क्या तलाशते हो ये महत्वपूर्ण है।

किसी व्यक्ति के प्रति इतना भी समर्पण नही होना चाहिये की आप स्वयं को धीरे धीरे खोने लगे

इतना भी चुप न रहना कभी कि लोग