सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
जिसे तुम अपना समझ कर खुश हो रहे हो बस यही प्रसनता तुम्हारे दुखो का कारण है..!!
छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है
अगर आप चाहते हैं कि कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये
स्मार्ट बनो क्योंकि कोई भी आपका रिजल्ट देखता है मेहनत नही
सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।
सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाभी से खुलता है
जिसे तुम अपना समझ कर खुश हो रहे हो बस यही प्रसनता तुम्हारे दुखो का कारण है..!!
छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है
अगर आप चाहते हैं कि कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये
स्मार्ट बनो क्योंकि कोई भी आपका रिजल्ट देखता है मेहनत नही