जिसके साथ बात करने से ही खुशी दोगुनी और दुख आधा रह जाये, वो ही अपना है.. बाकी तो बस दुनिया है..!!
एक ऐसा लक्ष्य भी होना चाहिए जो सुबह उठने पर मजबूर कर दे.
हमारा 'व्यवहार' कई बार हमारे 'ज्ञान' से अधिक 'अच्छा' साबित होता है। क्योंकि जीवन में जब 'विषम' परिस्थितियां आती हैं तब ज्ञान 'हार' सकता है परन्तु 'व्यवहार' से हमेशा 'जीत' होने की 'संभावना' रहती है
ज़िन्दगी में जो सुख मिलता है उसमें दुःख जरूर होता है, तो हमेशा खुश रहे क्योंकि जो होना है वो होकर ही रहेगा
भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है। अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता
मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है
जिसके साथ बात करने से ही खुशी दोगुनी और दुख आधा रह जाये, वो ही अपना है.. बाकी तो बस दुनिया है..!!
एक ऐसा लक्ष्य भी होना चाहिए जो सुबह उठने पर मजबूर कर दे.
हमारा 'व्यवहार' कई बार हमारे 'ज्ञान' से अधिक 'अच्छा' साबित होता है। क्योंकि जीवन में जब 'विषम' परिस्थितियां आती हैं तब ज्ञान 'हार' सकता है परन्तु 'व्यवहार' से हमेशा 'जीत' होने की 'संभावना' रहती है
ज़िन्दगी में जो सुख मिलता है उसमें दुःख जरूर होता है, तो हमेशा खुश रहे क्योंकि जो होना है वो होकर ही रहेगा
भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है। अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता
मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है