हम दिए को तो फूक मार के भुझा सकते है मगर अगरबत्ती को नही क्योंकि जो महकता है उसे कोन भुझा सकता है और जो जलता है वो तो खुद ही भुझ जाता है
इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी तुलना दूसरो से करना
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
खुशनसीब वो नहीं. जिसका नसीब अच्छा है. खुशनसीब वो है जो अपने नसीब से खुश है
अगर आप चाहते हैं कि कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये
हम दिए को तो फूक मार के भुझा सकते है मगर अगरबत्ती को नही क्योंकि जो महकता है उसे कोन भुझा सकता है और जो जलता है वो तो खुद ही भुझ जाता है
इंसान की सबसे बड़ी कमजोरी अपनी तुलना दूसरो से करना
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
किसी के आगे हाथ फैलाने से अच्छा अपने हाथों को काम मे लगा दो
खुशनसीब वो नहीं. जिसका नसीब अच्छा है. खुशनसीब वो है जो अपने नसीब से खुश है
अगर आप चाहते हैं कि कोई चीज अच्छे से हो तो उसे खुद कीजिये