अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
मूर्ख का हृदय सूना रहता है, पुत्र रहित घर सुना रहता है, लेकिन गरीब का घर इनसे कहीं अधिक सूना रहता है. अतः आदमी को परिश्रम करके इस पर विजय पानी चाहिए.
{ दुनिया सिर्फ..}
जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए
छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है
हो सके तो कभी किसी से जलना मत क्योंकि ऊपर वाला जिसे देता है उसे अपने खजाने में से देता है तुमसे छीन के नही देता
अपनो से इतनी दूरी ना बढ़ाए की दरवाजा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े
मूर्ख का हृदय सूना रहता है, पुत्र रहित घर सुना रहता है, लेकिन गरीब का घर इनसे कहीं अधिक सूना रहता है. अतः आदमी को परिश्रम करके इस पर विजय पानी चाहिए.
{ दुनिया सिर्फ..}
जब अपने ही परिंदे किसी और के दाने के आदी हो जाए तो उन्हें आजाद कर देना चाहिए
छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है
हो सके तो कभी किसी से जलना मत क्योंकि ऊपर वाला जिसे देता है उसे अपने खजाने में से देता है तुमसे छीन के नही देता