जब ठोकर खा कर भी ... ना गिरो ... तो समझ लेना... की दुआओं ने थाम रखा है ...!!

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न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे और न ही इतने मीठे बनों की कोई निगल जाए.

जब कोई आपसे दो कदम पीछे हटे तो उसे उम्र भर खुश रहने की दुआ देकर चार कदम पीछे हट जाने में ही भलाई है

ज़िन्दगी बहुत हसीन है, कभी हंसाती है, तो कभी रुलाती है, लेकिन जो ज़िन्दगी की भीड़ में खुश रहता है, ज़िन्दगी उसी के आगे सिर झुकाती है।

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है

बहुत मुश्किल है उस शख्स को गिराना, जिसको चलना ठोकरों ने सिखाया हो .

गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती

न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे और न ही इतने मीठे बनों की कोई निगल जाए.

जब कोई आपसे दो कदम पीछे हटे तो उसे उम्र भर खुश रहने की दुआ देकर चार कदम पीछे हट जाने में ही भलाई है

ज़िन्दगी बहुत हसीन है, कभी हंसाती है, तो कभी रुलाती है, लेकिन जो ज़िन्दगी की भीड़ में खुश रहता है, ज़िन्दगी उसी के आगे सिर झुकाती है।

जिंदगी को सफल बनाने के लिए बातों से नहीं रातों से लड़ना पड़ता है

बहुत मुश्किल है उस शख्स को गिराना, जिसको चलना ठोकरों ने सिखाया हो .

गलतियां सुधार लेना ही आख़िरी विकल्प है क्योंकि चिंता कभी परिणाम को बदल नही सकती