जब ठोकर खा कर भी ... ना गिरो ... तो समझ लेना... की दुआओं ने थाम रखा है ...!!

जब ठोकर खा कर भी ... ना गिरो ... तो समझ लेना... की दुआओं ने थाम रखा है ...!!

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जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही

जिस रिश्ते में हमारी अहमियत खत्म हो चुकी हो, उसे चुप चाप छोड़ देना ही बेहतर है

जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.

" समय " और " शब्द ' दोनों का उपयोग " लापरवाही " से ना करें क्योंकि ये " दोनों " ना दुबारा आते हैं ना " मौका " देते है !

मुश्किल वक़्त में किसी का सहारा बनो सलाहकार नही

रोना बंद करो और अपनी तकलीफों से खुद लड़ना सीखो क्योंकि साथ देने वाले भी शमशान से आगे नही जाते..

जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही

जिस रिश्ते में हमारी अहमियत खत्म हो चुकी हो, उसे चुप चाप छोड़ देना ही बेहतर है

जहाँ दूसरे को समझाना मुश्किल हो जाये, वहाँ खुद को समझा लेना बहतर होता है.

" समय " और " शब्द ' दोनों का उपयोग " लापरवाही " से ना करें क्योंकि ये " दोनों " ना दुबारा आते हैं ना " मौका " देते है !

मुश्किल वक़्त में किसी का सहारा बनो सलाहकार नही

रोना बंद करो और अपनी तकलीफों से खुद लड़ना सीखो क्योंकि साथ देने वाले भी शमशान से आगे नही जाते..