होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये
खुश रहना है तो जिंदगी के फैसले अपनी परिस्थिति देखकर ले दुनिया को देखकर जो फैसले लेते है वो दुःखी ही रहते हैं
कभी यह मत सोचो कि आप अकेले हो बल्कि यह सोचो की आप अकेले ही काफी हो
कभी पीछे मुड़कर मत देखो क्योंकि जो छूट गया वो आपका था ही नही
मौन रहना अच्छा है परन्तु अन्याय हो तब नही
धन से ज्ञान उत्तम है, क्योंकि धन की रक्षा करनी पड़ती है और ज्ञान हमारी रक्षा करता है
होकर मायूस न यूँ शाम की तरह ढलते रहिये, जिंदगी एक भोर है सूरज की तरह निकलते रहिये
खुश रहना है तो जिंदगी के फैसले अपनी परिस्थिति देखकर ले दुनिया को देखकर जो फैसले लेते है वो दुःखी ही रहते हैं
कभी यह मत सोचो कि आप अकेले हो बल्कि यह सोचो की आप अकेले ही काफी हो
कभी पीछे मुड़कर मत देखो क्योंकि जो छूट गया वो आपका था ही नही
मौन रहना अच्छा है परन्तु अन्याय हो तब नही
धन से ज्ञान उत्तम है, क्योंकि धन की रक्षा करनी पड़ती है और ज्ञान हमारी रक्षा करता है