जो नहीं लड़ते वही तो हार जाते हैं हौसले वाले तो बाज़ी मार जाते हैं...
शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं
विद्या निरंतरता से अक्षुण्ण बनी रहती है. आलस्य से उसका लोप हो जाता है. धन यदि दूसरे के पास है तो अपना होने पर भी वह जरूरत पड़ने पर काम नहीं आता है. खेत में बिज न पड़े तो वह बंजर हो जाता है, उसी प्रकार कुशल सेनापति के अभाव में चतुरंगिणी सेना भी नष्ट हो जाती है.
वजूद सबका अपना अपना है सूर्य के सामने दीपक का ना सही अंधेरे के आगे बहुत कुछ है
हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.
जो नहीं लड़ते वही तो हार जाते हैं हौसले वाले तो बाज़ी मार जाते हैं...
शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं
विद्या निरंतरता से अक्षुण्ण बनी रहती है. आलस्य से उसका लोप हो जाता है. धन यदि दूसरे के पास है तो अपना होने पर भी वह जरूरत पड़ने पर काम नहीं आता है. खेत में बिज न पड़े तो वह बंजर हो जाता है, उसी प्रकार कुशल सेनापति के अभाव में चतुरंगिणी सेना भी नष्ट हो जाती है.
वजूद सबका अपना अपना है सूर्य के सामने दीपक का ना सही अंधेरे के आगे बहुत कुछ है
हमेशा उम्मीद से अधिक करो... सफलता आपके कदम चूमेगी...
लक्ष्मी चंचल है. प्राण, जीवन, शरीर सब कुछ चंचल और नाशवान हैं. संसार में केवल धर्म ही निश्चल है.