अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...
याद रखना, सपना तुम्हारे है, तो पूरा भी तुम ही करोगे .! न ही हालात तुम्हारे हिसाब से होंगे और न लोग
वर्तमान से सुख लेने का प्रयास करिये भविष्य बहुत कपटी होता है, वो केवल आश्र्वासन देता है गारंटी नहीं।
मौन रहना अच्छा है परन्तु....
अगर "बुरे वक्त" में कोई आकर यह "कह" दे कि.. "चिंता मत करो" मैं तुम्हारे "साथ" हूँ! तो बस ये "शब्द" ही "व्यक्ति" के लिए "औषधि" बन जाते हैं ..!!
...किसी ने क्या खूब लिखा है "वक़्त" निकालकर "बाते" कर लिया करो "अपनों से" अगर "अपने ही" न रहेंगे तो "वक़्त" का क्या करोगे....!"
जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...
याद रखना, सपना तुम्हारे है, तो पूरा भी तुम ही करोगे .! न ही हालात तुम्हारे हिसाब से होंगे और न लोग
वर्तमान से सुख लेने का प्रयास करिये भविष्य बहुत कपटी होता है, वो केवल आश्र्वासन देता है गारंटी नहीं।
मौन रहना अच्छा है परन्तु....