मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है
घमंड शराब की तरह है आपके अलावा सबको पता है की आपको चढ़ गई है
जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...
सिर्फ उतना ही विन्रम बनो जितना जरूरी हो वेवजह की विनम्रता दुसरो के
प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है
अगर आप हमेशा अहंकार से भरे रहते हैं तो फिर इस दुनिया में आपके लिए सीखने को कुछ भी नहीं है ।
मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है
घमंड शराब की तरह है आपके अलावा सबको पता है की आपको चढ़ गई है
जब सोच में मोच आती है तब हर रिश्ते में खरोंच आती हैं...
सिर्फ उतना ही विन्रम बनो जितना जरूरी हो वेवजह की विनम्रता दुसरो के
प्रत्येक अवसर के लिए तैयार रहना ही सफलता है
अगर आप हमेशा अहंकार से भरे रहते हैं तो फिर इस दुनिया में आपके लिए सीखने को कुछ भी नहीं है ।