खुद से जितना दुनिया की सबसे बड़ी जीत है
विद्या निरंतरता से अक्षुण्ण बनी रहती है. आलस्य से उसका लोप हो जाता है. धन यदि दूसरे के पास है तो अपना होने पर भी वह जरूरत पड़ने पर काम नहीं आता है. खेत में बिज न पड़े तो वह बंजर हो जाता है, उसी प्रकार कुशल सेनापति के अभाव में चतुरंगिणी सेना भी नष्ट हो जाती है.
भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.
मन मे उतरना और मन से उतरना, केवल आपके स्वभाव पर निर्भर करता है
गलतियों से न सीखना ही एकमात्र गलती होती है
यदि कोई व्यक्ति आपको नीचे गिराने के लिए मजबूती से खड़ा है, तो उन्हें दिखाए की आप उठने के लिए उससे दुगनी मजबूती से खड़े है
खुद से जितना दुनिया की सबसे बड़ी जीत है
विद्या निरंतरता से अक्षुण्ण बनी रहती है. आलस्य से उसका लोप हो जाता है. धन यदि दूसरे के पास है तो अपना होने पर भी वह जरूरत पड़ने पर काम नहीं आता है. खेत में बिज न पड़े तो वह बंजर हो जाता है, उसी प्रकार कुशल सेनापति के अभाव में चतुरंगिणी सेना भी नष्ट हो जाती है.
भोजन महत्वपूर्ण नहीं है, महत्वपूर्ण है कार्य व उसके प्रति निष्ठा. पेट तो जानवर भी भर लेते हैं. अतः मानव बनो.
मन मे उतरना और मन से उतरना, केवल आपके स्वभाव पर निर्भर करता है
गलतियों से न सीखना ही एकमात्र गलती होती है
यदि कोई व्यक्ति आपको नीचे गिराने के लिए मजबूती से खड़ा है, तो उन्हें दिखाए की आप उठने के लिए उससे दुगनी मजबूती से खड़े है