जीवन में उन सपनों का कोई महत्व नही जिनको पूरा करने के लिए अपनो से ही छल करना पडे
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।
अपने काम को एक रहस्य ही रहने दो लोगो को काम का नतीजा दिखाओ
घाव को भरने के लिए आपको उसे छूना बंद करना होगा
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।
जीवन में उन सपनों का कोई महत्व नही जिनको पूरा करने के लिए अपनो से ही छल करना पडे
ईश्वर ना काष्ठ में है, न मिट्टी में, न ही मूर्ति में. वह केवल भावना में होता है. अतः भावना ही मुख्य है.
दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।
अपने काम को एक रहस्य ही रहने दो लोगो को काम का नतीजा दिखाओ
घाव को भरने के लिए आपको उसे छूना बंद करना होगा
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाए भीगे हर शब्द पर अर्थ बहने न पाए ।