तकलीफ हमेशा उन्हें बताओ जो समझने के काबिल हो
मुस्कुराहटें झूठी भी हो सकती है.. इंसान को देखना नही समझना सीखो
स्वयं को ऐसा बनाओ कि जहाँ से तुम चले जाओ वहाँ तुम्हें सब याद करें और जहाँ तुम पहुँचने वाले हो वहाँ तुम्हारा सब इंतज़ार करें
"हुनर" होगा तो दुनिया खुद कदर करेगी "एड़ियाँ" उठाने से किरदार ऊँचे नही होते..
इंसान सफल तब होता है जब वो जरूरत और चाहत के बीच फर्क समझ लेता है
पैर खिचने से अच्छा है हाथ खिंचिये, क्या पता अपना कोई ऊपर आ जाये !!
तकलीफ हमेशा उन्हें बताओ जो समझने के काबिल हो
मुस्कुराहटें झूठी भी हो सकती है.. इंसान को देखना नही समझना सीखो
स्वयं को ऐसा बनाओ कि जहाँ से तुम चले जाओ वहाँ तुम्हें सब याद करें और जहाँ तुम पहुँचने वाले हो वहाँ तुम्हारा सब इंतज़ार करें
"हुनर" होगा तो दुनिया खुद कदर करेगी "एड़ियाँ" उठाने से किरदार ऊँचे नही होते..
इंसान सफल तब होता है जब वो जरूरत और चाहत के बीच फर्क समझ लेता है
पैर खिचने से अच्छा है हाथ खिंचिये, क्या पता अपना कोई ऊपर आ जाये !!