खुद मेँ झाँकने के लिए जिगर चाहिए दूसरों की शिनाख्त में तो हर शख़्स माहिर है
अपनी नजर हमेशा उस चीज पर रखो जिसे तुम पाना चाहते हो.. उस पर नही जिसे तुम खो चुके हो
वजूद सबका अपना अपना है सूर्य के सामने दीपक का ना सही अंधेरे के आगे बहुत कुछ है
जैसे आपके दोस्त होंगे वैसा ही आपका भविष्य बनेगा
अकेलापन तब महसूस नही होता जब आप अकेले हो बल्कि तब महसूस होता जब कोई आपको परवाह नही करता
सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.
खुद मेँ झाँकने के लिए जिगर चाहिए दूसरों की शिनाख्त में तो हर शख़्स माहिर है
अपनी नजर हमेशा उस चीज पर रखो जिसे तुम पाना चाहते हो.. उस पर नही जिसे तुम खो चुके हो
वजूद सबका अपना अपना है सूर्य के सामने दीपक का ना सही अंधेरे के आगे बहुत कुछ है
जैसे आपके दोस्त होंगे वैसा ही आपका भविष्य बनेगा
अकेलापन तब महसूस नही होता जब आप अकेले हो बल्कि तब महसूस होता जब कोई आपको परवाह नही करता
सिद्ध- औषधि का मर्म, गुप्त वार्ता, घर का भेद, अपमान कि बात, इन सभी को गुप्त रखना ही हितकर होता हैं.