इतने दर्द के बाद भी मुस्कुरा रहा हूँ ए ज़िंदगी देख तुझे कैसे हरा रहा हूँ मैं
मौन रहना अच्छा है परन्तु....
किसी भी व्यक्ति को ज्यादा सुधारना चाहोगे तो वो आपका दुश्मन बन जायेगा
कैलेंडर हमेशा तारीख को बदलता है। पर एक दिन ऐसी तारीख भी आती है कि जो कैलेंडर को ही बदल देती है। इसलिए सब्र रखो, वक़्त हर किसी का आता है।।"
कोई जाति नीच नही होती लेकिन नीच आदमी हर जाति में होता है
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
इतने दर्द के बाद भी मुस्कुरा रहा हूँ ए ज़िंदगी देख तुझे कैसे हरा रहा हूँ मैं
मौन रहना अच्छा है परन्तु....
किसी भी व्यक्ति को ज्यादा सुधारना चाहोगे तो वो आपका दुश्मन बन जायेगा
कैलेंडर हमेशा तारीख को बदलता है। पर एक दिन ऐसी तारीख भी आती है कि जो कैलेंडर को ही बदल देती है। इसलिए सब्र रखो, वक़्त हर किसी का आता है।।"
कोई जाति नीच नही होती लेकिन नीच आदमी हर जाति में होता है
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा