तुम्हे अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी क्युकि लोग बुरे वक़्त में सिर्फ सलाह देते है साथ नहीं

तुम्हे अपनी लड़ाई खुद ही लड़नी होगी क्युकि लोग बुरे वक़्त में सिर्फ सलाह देते है साथ नहीं

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विश्वाश में वो ताकत है जिससे हम जो चाहे संपत्ति खरीद सकते है

जिस रिश्ते में हमारी अहमियत खत्म हो चुकी हो, उसे चुप चाप छोड़ देना ही बेहतर है

ऐसी कोई मंजिल नहीं जहां तक पहुंचने का कोई रास्ता ना हो .

बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे

पंख मिलते ही जो जमीन भूल जाता है वो ज्यादा दिन आकाश में उड़ नही पता है..

निखरती है मुसीबतों से शख्शियत यारो..जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का

विश्वाश में वो ताकत है जिससे हम जो चाहे संपत्ति खरीद सकते है

जिस रिश्ते में हमारी अहमियत खत्म हो चुकी हो, उसे चुप चाप छोड़ देना ही बेहतर है

ऐसी कोई मंजिल नहीं जहां तक पहुंचने का कोई रास्ता ना हो .

बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं आपके दिए संस्कार खिलाएंगे

पंख मिलते ही जो जमीन भूल जाता है वो ज्यादा दिन आकाश में उड़ नही पता है..

निखरती है मुसीबतों से शख्शियत यारो..जो चट्टान से ही ना उलझे वो झरना किस काम का