ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
किस्मत करवाती है कटपुतली का खेल जनाब वरना, ज़िन्दगी के रंगमंच पर कोई भी कलाकार कमज़ोर नहीं होता!!
नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है उन्हें आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता
"बहुत मुश्किल नहीं हैं, ज़िंदगी की सच्चाई समझना, "जिस तराज़ू ⚖पर दूसरों को तौलते हैं, उस पर कभी ख़ुद बैठ के देखिये।
कोशिश तब तक जारी रखो, जब तक मजिल ना मिल जाए..
कोई भी "व्यक्ति" हमारा "मित्र" या "शत्रु" बनकर "संसार" में नही आता हमारा "व्यवहार" और "शब्द" ही लोगो को "मित्र" और "शत्रु" बनाते है
ब्राह्मण, गुरु, अग्नि, कुंवारी कन्या, बालक, और वृद्धों को पेरो से नहीं छूना चाहिए. ये सभी आदरणीय है. हमें इन्हें आदर-सम्मान देना चाहिए.
किस्मत करवाती है कटपुतली का खेल जनाब वरना, ज़िन्दगी के रंगमंच पर कोई भी कलाकार कमज़ोर नहीं होता!!
नींद और निंदा पर जो विजय पा लेते है उन्हें आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता
"बहुत मुश्किल नहीं हैं, ज़िंदगी की सच्चाई समझना, "जिस तराज़ू ⚖पर दूसरों को तौलते हैं, उस पर कभी ख़ुद बैठ के देखिये।
कोशिश तब तक जारी रखो, जब तक मजिल ना मिल जाए..
कोई भी "व्यक्ति" हमारा "मित्र" या "शत्रु" बनकर "संसार" में नही आता हमारा "व्यवहार" और "शब्द" ही लोगो को "मित्र" और "शत्रु" बनाते है