घड़ी ठीक करने वाले बहुत है मगर समय तो मेरा मुरली वाला ही ठीक करता है..
संसार में सुई बनकर रहे, कैंची बनकर नही क्योंकि सुई 2 को 1 कर देती है और कैंची 1 को 2 कर देती है अर्थात सबको जोड़ो, तोड़ो नही
""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।
जिंदगी में कुछ करना और कुछ बनना हैं, तो अकेले रहने की आदत डालो
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।
घड़ी ठीक करने वाले बहुत है मगर समय तो मेरा मुरली वाला ही ठीक करता है..
संसार में सुई बनकर रहे, कैंची बनकर नही क्योंकि सुई 2 को 1 कर देती है और कैंची 1 को 2 कर देती है अर्थात सबको जोड़ो, तोड़ो नही
""कामयाबी"" के सफर में "धूप" का बड़ा महत्व होता हैं! क्योंकि ""छांव"" मिलते ही "कदम" रुकने लगते है।
जिंदगी में कुछ करना और कुछ बनना हैं, तो अकेले रहने की आदत डालो
वक्त बीतने के बाद अक्सर यह अहसास होता है.. जो छूट गया वो लम्हा
पिता, माता अग्नि, आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।