समय कई ज़ख्म देता है इसलिए घड़ी में फूल नही काटे होते है
जिस प्रकार घिसने, तापने, काटने और पीटने से सोने का परीक्षण होता है. उसी प्रकार त्याग, शील, गुण, एवं कर्मों से पुरुष कि परीक्षा होती है.
नीम कि जड़ में मीठा दूध डालने से नीम मीठा नहीं हो सकता, उसी प्रकार कितना भी समझाओ, दुर्जन व्यक्ति का साधु बनना मुश्किल है.
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
अगर आप हमेशा अहंकार से भरे रहते हैं तो फिर इस दुनिया में आपके लिए सीखने को कुछ भी नहीं है ।
'बदलना' तय है ! हर चीज़ का.. इस संसार में...! बस कर्म अच्छे करें..
समय कई ज़ख्म देता है इसलिए घड़ी में फूल नही काटे होते है
जिस प्रकार घिसने, तापने, काटने और पीटने से सोने का परीक्षण होता है. उसी प्रकार त्याग, शील, गुण, एवं कर्मों से पुरुष कि परीक्षा होती है.
नीम कि जड़ में मीठा दूध डालने से नीम मीठा नहीं हो सकता, उसी प्रकार कितना भी समझाओ, दुर्जन व्यक्ति का साधु बनना मुश्किल है.
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
अगर आप हमेशा अहंकार से भरे रहते हैं तो फिर इस दुनिया में आपके लिए सीखने को कुछ भी नहीं है ।
'बदलना' तय है ! हर चीज़ का.. इस संसार में...! बस कर्म अच्छे करें..