मेहनत लगती है सपनों को सच बनाने में, हौसला लगता है बुलन्दियों को पाने में, बरसो लगते है जिन्दगी बनाने में, और जिन्दगी फिर भी कम पडती है रिश्ते निभाने में।!
अगर परमात्मा तुम्हे कष्ट के पास ले आया तो अवश्य ही वो तुम्हे कष्ट के पार भी ले जाएगा
देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है
जिस समय भी आप यह सोचना शुरू कर देते है कि यदि मैं लक्ष्य को हासिल नही कर सका तो फिर क्या करूँगा उसी समय ही आप हार जाते है
समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .
मै रात भर जन्नत की सैर करता रहा यारों, आंख खुली तोह देखा सर माँ के कदमो मे था.
मेहनत लगती है सपनों को सच बनाने में, हौसला लगता है बुलन्दियों को पाने में, बरसो लगते है जिन्दगी बनाने में, और जिन्दगी फिर भी कम पडती है रिश्ते निभाने में।!
अगर परमात्मा तुम्हे कष्ट के पास ले आया तो अवश्य ही वो तुम्हे कष्ट के पार भी ले जाएगा
देश में "राजा" समाज में "गुरु" परिवार में "पिता" घर में "स्त्री" ये कभी "साधारण" नहीं होते क्योंकि ~ निर्माण और प्रलय ~ इन्हीं के "हाथ" में होता है
जिस समय भी आप यह सोचना शुरू कर देते है कि यदि मैं लक्ष्य को हासिल नही कर सका तो फिर क्या करूँगा उसी समय ही आप हार जाते है
समझदार वही है जो फूँक-फूँक कर कदम रखे, पानी को छानकर पिए, शास्त्रानुसार वाक्य बोले और सोच-विचार कर कर्म करे. इस तरह किए गए कार्य में सफलता अवश्य मिलती है .
मै रात भर जन्नत की सैर करता रहा यारों, आंख खुली तोह देखा सर माँ के कदमो मे था.